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ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम मानव रक्त को वर्गीकृत करने का एक तरीका है, जो लाल रक्त कोशिकाओं ..

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम

Avinash
February 28, 2025

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम क्या है? इसकी खोज किसने की और यह ब्लड ट्रांसफ्यूजन (blood transfusion) में इतना महत्वपूर्ण क्यों है?🔗

ABO Blood Group System Overview1
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ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम मानव रक्त को वर्गीकृत करने का एक तरीका है, जो लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells - RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले A और B एंटीजन (antigens) की उपस्थिति या अनुपस्थिति पर आधारित है। इस सिस्टम की खोज कार्ल लैंडस्टीनर (Karl Landsteiner) ने 1901 में की थी, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला।

ABO सिस्टम ब्लड ट्रांसफ्यूजन में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बेमेल (incompatible) रक्त चढ़ाने से गंभीर, जानलेवा प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि A और B एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी (जिन्हें आइसोएग्लूटिनिन - isoagglutinins भी कहा जाता है) स्वाभाविक रूप से उन व्यक्तियों के प्लाज्मा (plasma) में मौजूद होते हैं, जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं में वह विशिष्ट एंटीजन नहीं होता। उदाहरण के लिए:

  • ग्रुप A वाले व्यक्ति में एंटी-B एंटीबॉडी (anti-B antibodies) होते हैं।
  • ग्रुप B वाले व्यक्ति में एंटी-A एंटीबॉडी (anti-A antibodies) होते हैं।
  • ग्रुप O वाले व्यक्ति में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी (anti-A and anti-B antibodies) होते हैं।
  • ग्रुप AB वाले व्यक्ति में कोई भी एंटीबॉडी नहीं होती।

अगर किसी व्यक्ति को गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाया जाता है (जैसे, ग्रुप B वाले व्यक्ति को ग्रुप A का रक्त), तो उसके प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडीज, दान किए गए रक्त की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर देती हैं, जिससे वे कोशिकाएं फट जाती हैं (hemolysis)। यह एक्यूट हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन (acute hemolytic transfusion reaction) कहलाता है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे सदमा (shock), गुर्दे की विफलता (renal failure), और DIC (Disseminated Intravascular Coagulation)।

ABO सिस्टम में मुख्य रक्त समूह कौन से हैं
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ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम में एंटीजन (antigens) और एंटीबॉडी (antibodies) की क्या भूमिका होती है? ये एंटीबॉडीज कब और कैसे बनती हैं?🔗

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम में:

  • एंटीजन (Antigens): ये लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मौजूद प्रोटीन (वास्तव में, ग्लाइकोप्रोटीन - glycoproteins और ग्लाइकोलिपिड्स - glycolipids) अणु होते हैं। A और B एंटीजन, H एंटीजन नामक एक मूल संरचना पर शर्करा (sugars) के जुड़ने से बनते हैं।
    • 'A' एंटीजन में H एंटीजन के साथ N-एसिटाइलग्लूकोसामाइन (N-acetylglucosamine) जुड़ा होता है।
    • 'B' एंटीजन में H एंटीजन के साथ D-गैलेक्टोज (D-galactose) जुड़ा होता है।
    • 'O' ब्लड ग्रुप में, H एंटीजन अपरिवर्तित (unmodified) रहता है, क्योंकि इसमें A या B एंटीजन बनाने के लिए आवश्यक एंजाइम (glycosyltransferases) नहीं होते।
  • एंटीबॉडी (Antibodies): ये प्लाज्मा में पाए जाने वाले प्रोटीन होते हैं, जो शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली (natural defense system) का हिस्सा होते हैं। ABO सिस्टम में, एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडीज, जिन्हें आइसोएग्लूटिनिन (isoagglutinins) भी कहा जाता है, स्वाभाविक रूप से उन व्यक्तियों में बनते हैं जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं में संबंधित एंटीजन नहीं होता।
    • ये एंटीबॉडीज ज्यादातर IgM प्रकार की होती हैं, हालांकि IgG प्रकार की एंटीबॉडीज भी बन सकती हैं (खासकर ग्रुप O वाली माताओं में, जो अपने शिशुओं में ABO हीमोलिटिक रोग - ABO hemolytic disease of the newborn पैदा कर सकती हैं)।

एंटीबॉडीज का बनना: ये एंटीबॉडीज जीवन के पहले कुछ वर्षों में बनती हैं, पर्यावरणीय पदार्थों (जैसे भोजन, बैक्टीरिया, वायरस) के संपर्क में आने से, जिनमें A और B एंटीजन के समान संरचनाएं (epitopes) होती हैं। उदाहरण के लिए, एंटी-A एंटीबॉडीज इन्फ्लूएंजा वायरस (influenza virus) के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) से उत्पन्न हो सकती हैं, क्योंकि इसके epitopes, A ग्लाइकोप्रोटीन पर α-D-N-galactosamine के समान होते हैं। शिशुओं में, ये एंटीबॉडी 3-6 महीने की उम्र के बाद पता लगाने योग्य स्तर तक पहुँच जाती हैं।

बॉम्बे ब्लड ग्रुप क्या है और यह सामान्य ABO ब्लड टाइप से कैसे भिन्न होता है
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ABO ब्लड ग्रुप की आनुवंशिकी (genetics) को विस्तार से समझाइये। विभिन्न जीनोटाइप (genotypes) और फेनोटाइप (phenotypes) क्या हैं?🔗

ABO ब्लड टाइप एक एकल जीन (ABO जीन) द्वारा नियंत्रित होता है, जो क्रोमोसोम 9 (chromosome 9) पर स्थित होता है। इस जीन के तीन मुख्य एलील (alleles) होते हैं: IA, IB, और i.

  • IA एलील, A एंटीजन बनाता है।
  • IB एलील, B एंटीजन बनाता है।
  • i एलील, कोई भी क्रियाशील एंटीजन (functional antigen) नहीं बनाता (अर्थात, केवल अपरिवर्तित H एंटीजन रहता है)।

IA और IB एलील, i एलील पर प्रभावी (dominant) होते हैं, और IA और IB एक-दूसरे के साथ सह-प्रभावी (co-dominant) होते हैं। इसका मतलब है:

  • जीनोटाइप (Genotype): एक व्यक्ति को प्रत्येक माता-पिता से एक एलील मिलता है, जिससे छह संभावित जीनोटाइप बनते हैं:

    • IAIA
    • IAi
    • IBIB
    • IBi
    • IAIB
    • ii
  • फेनोटाइप (Phenotype): ये जीनोटाइप चार संभावित फेनोटाइप (ब्लड ग्रुप) उत्पन्न करते हैं:

    • ग्रुप A: IAIA या IAi
    • ग्रुप B: IBIB या IBi
    • ग्रुप AB: IAIB
    • ग्रुप O: ii

ABO Blood Group System Overview
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बॉम्बे ब्लड ग्रुप (Bombay Blood Group) क्या है? यह ABO सिस्टम से कैसे अलग है, और इसकी आनुवंशिकी क्या है?🔗

बॉम्बे ब्लड ग्रुप (जिसे hh या Oh फेनोटाइप भी कहा जाता है) एक अत्यंत दुर्लभ ब्लड टाइप है। इसकी खोज सबसे पहले 1952 में मुंबई (तब बॉम्बे) में डॉ. वाई. एम. भेंडे (Dr. Y. M. Bhende) ने की थी।

ABO सिस्टम से भिन्नता: बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में लाल रक्त कोशिकाओं पर H एंटीजन नहीं होता, जो A और B एंटीजन का पूर्ववर्ती (precursor) है। इसका मतलब है कि भले ही उनमें A और/या B एलील मौजूद हों, वे A या B एंटीजन नहीं बना पाते। इसके अलावा, उनके सीरम (serum) में एंटी-H एंटीबॉडीज (anti-H antibodies) होती हैं, जो न केवल A, B और AB ब्लड ग्रुप, बल्कि O ब्लड ग्रुप की लाल रक्त कोशिकाओं पर भी प्रतिक्रिया करती हैं (क्योंकि O ब्लड ग्रुप में H एंटीजन होता है)।

आनुवंशिकी (Genetics): बॉम्बे फेनोटाइप H जीन (FUT1 जीन) के दो अप्रभावी (recessive) एलील (अर्थात, hh जीनोटाइप) विरासत में मिलने के कारण होता है। FUT1 जीन एक फ्यूकोसिलट्रांसफेरेज (fucosyltransferase) एंजाइम को कोड करता है, जो H एंटीजन के संश्लेषण (synthesis) में अंतिम चरण को उत्प्रेरित (catalyze) करता है। बॉम्बे फेनोटाइप में, यह एंजाइम निष्क्रिय (inactive) होता है, इसलिए H एंटीजन नहीं बन पाता।

बॉम्बे ब्लड ग्रुप क्या है और यह सामान्य ABO ब्लड ग्रुप से कैसे भिन्न होता है
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बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन की क्या चुनौतियाँ हैं? पैरा-बॉम्बे फेनोटाइप (para-Bombay phenotype) क्या है?🔗

बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे केवल बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें ABO सिस्टम के किसी भी अन्य ब्लड ग्रुप (A, B, AB, या O) का रक्त नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उनके सीरम में मौजूद एंटी-H एंटीबॉडीज, दाता (donor) की लाल रक्त कोशिकाओं पर हमला कर देंगी, जिससे गंभीर हीमोलिटिक ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन (hemolytic transfusion reaction) होगा।

बॉम्बे ब्लड ग्रुप अत्यंत दुर्लभ है (भारत में लगभग 10,000 में से 1 व्यक्ति में, और यूरोप में 10 लाख में से 1 व्यक्ति में पाया जाता है), इसलिए बॉम्बे ब्लड ग्रुप वाले डोनर को खोजना बहुत मुश्किल होता है।

पैरा-बॉम्बे फेनोटाइप (Para-Bombay Phenotype): यह बॉम्बे फेनोटाइप का एक और भी दुर्लभ प्रकार है। इसमें, व्यक्तियों में RBCs पर ABH एंटीजन की अभिव्यक्ति (expression) नहीं होती, लेकिन शरीर के स्रावों (secretions) में ABH एंटीजन की कुछ अभिव्यक्ति हो सकती है। ऐसा FUT1 जीन में उत्परिवर्तन (mutation) के कारण होता है, लेकिन FUT2 जीन (जो स्रावों में H एंटीजन बनाता है) क्रियाशील रहता है। पैरा-बॉम्बे वाले व्यक्तियों में भी एंटी-H एंटीबॉडीज बन सकती हैं, इसलिए उन्हें ट्रांसफ्यूजन के मामले में बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्तियों की तरह ही माना जाना चाहिए।



बॉम्बे ब्लड ग्रुप क्या है और यह सामान्य ABO ब्लड ग्रुप से कैसे भिन्न है
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